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स्लिप डिस्क में न्यूरोसर्जरी है कारगर
11 June 2018 / By Admin

कमर दर्द एक ऐसी दिक्कत है जो 80 फीसद लोगों को जीवन में एक बार जरूर होती है। हर कमर दर्द का कारण स्लिप डिस्क नहीं होता और हर स्लिप डिस्क का इलाज आपरेशन नहीं होता है।

• क्या है स्लिप डिस्क

स्पाइन में दो हड्डियों के बीच एक स्पंजनुमा संरचना होती है जिसका मुख्य कार्य शॉक एब्जार्बर का होता है। डिस्क का बाहरी हिस्सा एक मजबूत झिल्ली का बना होता है व बीच में एक तरल जेलीनुमा पदार्थ होता है। यह पदार्थ उम्र के साथ-साथ सूखने लगता है। जब किसी दबाव से गहरी झिल्ली फट जाती है या कमजोर हो जाती है तो जेलीनुमा पदार्थ निकलकर नसों पर दबाव डालता है जिसकी वजह से पैरों में दर्द या सुन्नपन होता है। नसों पर दबाव डिस्क के अलावा अन्य ऊतकों के बढ़ने से भी होता है।

• लक्षण

स्लिप डिस्क के लक्षण नस पर दबाव के आधार पर होता है। इसमें सामान्यत: कमर में दर्द होना व पैरों में दर्द या सुन्नपन होता है। बाद में पैर के अंगूठे या पंजे में कमजोरी भी आ सकती है। अगर स्पाइनल कार्ड के बीच में दबाव पड़ता है तो बैठने के स्थान पर सुन्नपन या मल-मूत्र का नियंत्रण भी प्रभावित हो सकता है। भारी सामान उठाने, ज्यादा देर खड़े होने, खांसने व छींकने से दर्द बढ़ सकता है। इसमें एमआरआई तथा कमर का एक्सरे जांच की जाती है।

• उपचार

ज्यादातर मरीजों को आपरेशन की जरूरत नहीं होती है किंतु इसमें दो से तीन हफ्ते तक पूर्ण आराम करना चाहिए। दर्द निवारक दवाएं और कुशल निर्देशन में फिजियोथिरेपी होनी चाहिए। कमर में खिंचाव का बहुत अधिक महत्व नहीं है।

• सावधानी

स्लिप डिस्क के मरीजों को भारी सामान नहीं उठाना चाहिए। आगे झुकना और ज्यादा व्यायाम भी नहीं करना चाहिए।

• कब होती है सर्जरी

जब मेडिकल उपचार से दर्द कम न हो, पैरों में कमजोरी आ जाए और मल मूत्र का विसर्जन प्रभावित हो तथा हड्डी खिसकना, गलना अथवा स्पाइन की कोई अन्य बीमारी हो तो सर्जरी ही कारगर होती है। माइक्रोस्कोप और इंडोस्कोप के द्वारा मिनिमल इनवेसिव माइक्रोडिसेक्टॉमी की जा सकती है। इसमें 1-2 सेमी के चीरे से इंडोस्कोप या माइक्रोस्कोप की मदद से दबी हुई नस के ऊपर की हड्डी का कुछ हिस्सा व डिस्क निकाली जाती है जिससे नस का दबाव खत्म हो जाता है। आपरेशन में दूरबीन विधि से ज्यादातर मांसपेशियों और ऊतकों को नहीं निकाला जाता है इसलिए मरीज को आपरेशन के बाद रिकवरी में कम समय लगता है। मरीज को उसी दिन अथवा दूसरे दिन घर भेजा जा सकता है।

मिनिमल इनवेसिव विधि द्वारा सभी मरीजों का इलाज संभव नहीं है। उपयुक्त मरीज का चुनाव लक्षणों व जांच रिपोर्ट पर निर्भर करता है। भविष्य में स्पाइन की अन्य बीमारियों का भी निदान संभव होगा। आपरेशन के बाद मरीज सीधे बैठ और चल सकता है। 10 से 15 फीसद मरीजों में दोबारा से स्लिप डिस्क के लक्षण आ सकते हैं, जिन मरीजों में ज्यादा समय से बीमारी हो या आपरेशन से पहले पैरों में कोई कमजोरी आ चुकी हो, उनमें कुछ लक्षण रह सकते हैं।

एक ऐसी दिक्कत है जो 80 फीसद लोगों को जीवन में एक बार जरूर होती है। हर कमर दर्द का कारण स्लिप डिस्क नहीं होता और हर स्लिप डिस्क का इलाज आपरेशन नहीं होता है।


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